श्री बृहस्पति देव की आरती (Shri Brihaspati Dev Ji Ki Aarti): ज्ञान, धन और सुख का दिव्य स्रोत
सनातन धर्म में बृहस्पति देव (भगवान विष्णु का स्वरूप) को देवताओं का गुरु माना गया है। वे बुद्धि, ज्ञान, धर्म, और सौभाग्य के अधिपति हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, नवग्रहों में गुरु (बृहस्पति) सबसे शुभ ग्रह माने जाते हैं। यदि जीवन में शिक्षा, विवाह, या आर्थिक उन्नति में बाधाएं आ रही हों, तो श्री बृहस्पति देव की आरती का गायन और बृहस्पतिवार का व्रत एक रामबाण उपाय है।
आज theshivling.com की विशेष लेख श्रृंखला में, हम श्री बृहस्पति देव की आरती के संपूर्ण लिरिक्स, उसके गहरे दार्शनिक भावार्थ, बृहस्पतिवार व्रत की वैज्ञानिक विधि और इसके पाठ से होने वाले चमत्कारी लाभों को 3000 शब्दों की गहराई के साथ विस्तार से समझेंगे।
श्री बृहस्पति देव की आरती
जय बृहस्पति देवा, ऊँ जय बृहस्पति देवा ।
छि छिन भोग लगाऊँ, कदली फल मेवा ॥
तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी ।
जगतपिता जगदीश्वर, तुम सबके स्वामी ॥
चरणामृत निज निर्मल, सब पातक हर्ता ।
सकल मनोरथ दायक, कृपा करो भर्ता ॥
तन, मन, धन अर्पण कर, जो जन शरण पड़े ।
प्रभु प्रकट तब होकर, आकर द्घार खड़े ॥
दीनदयाल दयानिधि, भक्तन हितकारी ।
पाप दोष सब हर्ता, भव बंधन हारी ॥
सकल मनोरथ दायक, सब संशय हारो ।
विषय विकार मिटाओ, संतन सुखकारी ॥
जो कोई आरती तेरी, प्रेम सहत गावे ।
जेठानन्द आनन्दकर, सो निश्चय पावे ॥
श्री बृहस्पति देव की आरती संपन्न
श्री बृहस्पति देव की आरती : Aarti of Shri Brihaspati Dev

Aarti of Shri Brihaspati Dev: English & Hinglish Translation
Jai Brihaspati Deva, Om Jai Brihaspati Deva.
Let me offer you sweet fruits and dry fruits.
You are the complete God, you are the inner one.
World Father Jagdishwar, Lord of all of you.
The nectar of my life is pure and removes all impurities.
Giver of all desires, please grant.
Offer your body, mind and wealth to those who seek shelter.
Then the Lord appeared and came and stood before us.
Deendayal Dayanidhi, devotee beneficial.
All sins and faults are removed, the bondage of life is lost.
Giver of all desires, defeat all doubts.
Eliminate sexual disorders, make children happy.
Whoever sings your aarti with love.
Jethanand rejoice, so you get assured.
श्री बृहस्पति देव की आरती संपन्न
॥ श्री बृहस्पति देव की आरती (Shri Brihaspati Dev Ji Ki Aarti) – संपूर्ण लिरिक्स ॥
जय बृहस्पति देवा, ऊँ जय बृहस्पति देवा । छिन छिन भोग लगाऊँ, कदली फल मेवा ॥ ऊँ जय बृहस्पति देवा…
विस्तृत व्याख्या: श्री बृहस्पति देव की आरती की शुरुआत में भक्त गुरुदेव को नमन करते हुए उन्हें ‘कदली’ (केला) और सूखे मेवों का भोग अर्पण करता है। बृहस्पति देव को पीली वस्तुएं अत्यंत प्रिय हैं। theshivling.com के पाठकों के लिए यह जानना जरूरी है कि केला केवल एक फल नहीं, बल्कि संपन्नता का प्रतीक है। हर ‘छिन’ (क्षण) भोग लगाने का भाव यह दर्शाता है कि भक्त का हर पल ईश्वर को समर्पित है।
तुम पूर्ण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी । जगतपिता जगदीश्र्वर, तुम सबके स्वामी ॥ ऊँ जय बृहस्पति देवा…
विस्तृत व्याख्या: यहाँ बृहस्पति देव को ‘पूर्ण परमात्मा’ और ‘अन्तर्यामी’ कहा गया है, जो सबके मन की बात जानते हैं। वे केवल देवताओं के गुरु नहीं, बल्कि समस्त जगत के पिता और स्वामी हैं। श्री बृहस्पति देव की आरती का यह छंद हमें यह अहसास कराता है कि हमारी बुद्धि के पीछे जो असली शक्ति है, वह गुरु ही हैं।
चरणामृत निज निर्मल, सब पातक हर्ता । सकल मनोरथ दायक, कृपा करो भर्ता ॥ ऊँ जय बृहस्पति देवा…
विस्तृत व्याख्या: गुरु के चरणों का अमृत (ज्ञान) अत्यंत निर्मल है, जो सभी ‘पातक’ (पापों) का नाश कर देता है। वे हमारे सभी मनोरथों (इच्छाओं) को पूर्ण करने वाले हैं।
तन, मन, धन अर्पण कर, जो जन शरण पड़े । प्रभु प्रकट तब होकर, आकर द्वार खड़े ॥ ऊँ जय बृहस्पति देवा…
विस्तृत व्याख्या: जो भक्त अपना अहंकार (तन, मन, धन) त्याग कर गुरु की शरण में जाता है, उसे ईश्वर के साक्षात दर्शन सुलभ होते हैं। यह समर्पण का सर्वोच्च भाव है जो श्री बृहस्पति देव की आरती में समाहित है।
Shri Brihaspati Dev Ji Ki Aarti: 3000 Words Mega Deep-Dive
बृहस्पतिवार व्रत और आरती का वैज्ञानिक और ज्योतिषीय महत्व
बृहस्पति (Jupiter) सौरमंडल का सबसे बड़ा ग्रह है। विज्ञान कहता है कि यह ग्रह पृथ्वी को अंतरिक्ष के खतरों से बचाने के लिए एक ‘वैक्यूम क्लीनर’ की तरह काम करता है। आध्यात्मिक रूप से, श्री बृहस्पति देव की आरती हमारी पीनियल ग्लैंड और एकाग्रता को प्रभावित करती है।
ज्योतिष शास्त्र में, गुरु ग्रह को भाग्य और विवाह का कारक माना गया है। यदि किसी कन्या के विवाह में देरी हो रही हो, या किसी छात्र को परीक्षा में सफलता न मिल रही हो, तो श्री बृहस्पति देव की आरती का नियमित पाठ करना चाहिए। theshivling.com का मानना है कि गुरुवार के दिन पीले वस्त्र पहनकर और पीले भोजन का सेवन कर आरती करने से शरीर का ‘आभामंडल’ (Aura) मजबूत होता है।
श्री बृहस्पति देव की आरती के २५ चमत्कारी लाभ (Deeply Explained)
१. ज्ञान की वृद्धि: बृहस्पति देव बुद्धि के दाता हैं, उनकी आरती से विवेक बढ़ता है।
२. शीघ्र विवाह: कन्याओं के विवाह में आने वाली बाधाएं श्री बृहस्पति देव की आरती से दूर होती हैं।
३. धन-संपत्ति: गुरु ग्रह की कृपा से घर में लक्ष्मी का स्थाई निवास होता है।
४. संतान सुख: सुयोग्य और आज्ञाकारी संतान की प्राप्ति के लिए यह आरती अचूक है।
५. नौकरी में प्रमोशन: कार्यस्थल पर मान-सम्मान और पदोन्नति मिलती है।
६. मानसिक शांति: गुरु के नाम का स्मरण तनाव को जड़ से मिटाता है।
७. पाप मुक्ति: जाने-अनजाने में हुए पापों का प्रायश्चित होता है।
८. एकाग्रता (Focus): छात्रों के लिए स्मरण शक्ति बढ़ाने का सबसे सरल साधन।
९. विवादों का अंत: कोर्ट-कचहरी और शत्रु बाधा से मुक्ति मिलती है।
१०. आरोग्य: पेट और पाचन संबंधी रोगों में गुरु की पूजा लाभ देती है।
११. सौभाग्य की प्राप्ति: सोया हुआ भाग्य श्री बृहस्पति देव की आरती से जाग उठता है।
१२. वैवाहिक जीवन में मधुरता: पति-पत्नी के बीच संबंधों में सुधार आता है।
१३. नकारात्मक ऊर्जा का नाश: घर में सुख और समृद्धि का संचार होता है।
१४. पितृ दोष शांति: गुरु की पूजा से पूर्वजों को सद्गति प्राप्त होती है।
१५. धर्म में रुचि: व्यक्ति का मन ईश्वर और सत्कर्मों की ओर झुकता है।
१६. संकल्प शक्ति: लक्ष्यों को पाने की जिद्द पैदा होती है।
१७. कुंडलिनी जागरण: ‘आज्ञा चक्र’ को सक्रिय करने में सहायक।
१८. विदेश यात्रा: उच्च शिक्षा और व्यापार के लिए विदेश जाने के योग बनते हैं।
१९. आर्थिक स्थिरता: अनावश्यक खर्चों पर रोक लगती है।
२०. सच्चे गुरु की प्राप्ति: जीवन में सही मार्गदर्शन मिलता है।
२१. ग्रह बाधा शांति: कुंडली के अन्य ग्रहों के अशुभ प्रभाव कम होते हैं।
२२. यश और कीर्ति: समाज में एक प्रभावशाली व्यक्तित्व का निर्माण होता है।
२३. भय का नाश: भविष्य को लेकर अनजाना डर खत्म होता है।
२४. ईश्वर से जुड़ाव: यह हमें ब्रह्मांड की सर्वोच्च ऊर्जा से जोड़ती है।
२५. मोक्ष का मार्ग: अंततः गुरु ही पार लगाने वाले हैं।
बृहस्पतिवार पूजा की विशेष विधि (theshivling Special)
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- समय: सुबह सूर्योदय के समय स्नान कर पीले वस्त्र पहनें।
- सामग्री: चने की दाल, गुड़, मुनक्का और पीले फूल।
- विधि: केले के वृक्ष (Kela Tree) की जड़ में जल अर्पित करें और वहां दीपक जलाएं।
- पाठ: बृहस्पतिवार व्रत कथा सुनने के बाद श्री बृहस्पति देव की आरती का गायन करें।
- वर्जन: इस दिन सिर धोना, साबुन लगाना या कैंची का उपयोग करना वर्जित माना गया है।
बृहस्पतिवार व्रत कथा: त्याग और श्रद्धा का अद्भुत उदाहरण
श्री बृहस्पति देव की आरती का पूर्ण फल प्राप्त करने के लिए बृहस्पतिवार की व्रत कथा का श्रवण करना अनिवार्य माना गया है। प्राचीन ग्रंथों के अनुसार, एक प्रतापी राजा था जो बहुत ही दानपुण्य करता था, लेकिन उसकी रानी को दान देना और धर्म-कर्म करना पसंद नहीं था। एक दिन स्वयं बृहस्पति देव एक साधु का रूप धरकर राजा के द्वार पर आए और रानी से भिक्षा माँगी। रानी ने कहा कि वह दान-पुण्य से ऊब चुकी है और चाहती है कि उसका सारा धन नष्ट हो जाए ताकि वह आराम से रह सके।
साधु (बृहस्पति देव) ने रानी की इच्छा पूरी करने के लिए एक विधि बताई, जिसे करने से सात गुरुवार के भीतर राजा का सारा वैभव नष्ट हो गया और वह दर-दर भटकने लगा। जब रानी और राजा अत्यधिक कष्ट में आ गए, तब उन्हें अपनी भूल का अहसास हुआ। तब पुनः बृहस्पति देव ने प्रकट होकर उन्हें बृहस्पतिवार का व्रत करने और श्री बृहस्पति देव की आरती गाने की सलाह दी। रानी ने पूरी श्रद्धा से व्रत किया और पुनः खोया हुआ राज्य और सुख प्राप्त किया। यह कथा हमें सिखाती है कि अहंकार और आलस्य लक्ष्मी को दूर भगाते हैं, जबकि गुरु की भक्ति और श्री बृहस्पति देव की आरती दरिद्रता का नाश करती है।
ज्योतिष शास्त्र में बृहस्पति (Jupiter) का प्रभाव और ‘गजकेसरी योग’
ज्योतिष विज्ञान के अनुसार, बृहस्पति को ‘जीव’ कहा गया है। जिस व्यक्ति की कुंडली में गुरु मजबूत होता है, वह स्वभाव से शांत, बुद्धिमान और परोपकारी होता है। theshivling.com के पाठकों के लिए यह जानना अत्यंत लाभकारी होगा कि जब कुंडली में चंद्रमा और गुरु एक-दूसरे से केंद्र में होते हैं, तो ‘गजकेसरी योग’ का निर्माण होता है। यह योग व्यक्ति को अपार धन, ख्याति और उच्च पद दिलाता है।
यदि आपकी कुंडली में गुरु ग्रह कमजोर है या नीच का है, तो आपको श्री बृहस्पति देव की आरती का नित्य पाठ करना चाहिए। गुरु का अशुभ प्रभाव व्यक्ति को शिक्षा में असफलता, लीवर संबंधी रोग, और विवाह में देरी दे सकता है। गुरुवार के दिन श्री बृहस्पति देव की आरती का उच्चारण करने से ब्रह्मांड की शुभ ऊर्जा आकर्षित होती है, जो कुंडली के दोषों को धीरे-धीरे कम करने लगती है। विशेषकर पुनर्वसु, विशाखा और पूर्वाभाद्रपद नक्षत्रों में जन्मे जातकों के लिए गुरु की यह आरती एक दिव्य सुरक्षा कवच का कार्य करती है।
गुरु कृपा पाने के १० विशेष और गुप्त सूत्र (theshivling Special)
केवल श्री बृहस्पति देव की आरती गाना ही पर्याप्त नहीं है, यदि आप इसके साथ नीचे दिए गए नियमों का पालन करते हैं, तो परिणाम बहुत तेजी से मिलते हैं:
- बड़ों का सम्मान: बृहस्पति देव साक्षात गुरु हैं। जो व्यक्ति अपने माता-पिता, गुरु और बुजुर्गों का अनादर करता है, उसका गुरु ग्रह कभी शुभ फल नहीं देता। आरती के बाद अपने गुरु के चरण स्पर्श जरूर करें।
- पीली वस्तुओं का दान: गुरुवार के दिन चने की दाल, हल्दी, पीले वस्त्र या केसर का दान किसी ब्राह्मण या गरीब को करें। यह श्री बृहस्पति देव की आरती के फल को सौ गुना बढ़ा देता है।
- केले के वृक्ष की महिमा: शास्त्र कहते हैं कि केले के वृक्ष में साक्षात भगवान विष्णु और बृहस्पति देव का वास होता है। गुरुवार को वृक्ष में जल अर्पित करते समय श्री बृहस्पति देव की आरती का मन ही मन जाप करें।
- नमक का त्याग: बृहस्पतिवार के व्रत में नमक का सेवन वर्जित है। बिना नमक का पीला भोजन (जैसे चने की दाल या बेसन का हलवा) करने से गुरु देव अति प्रसन्न होते हैं।
- मंत्र जप: आरती के बाद “ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं स: बृहस्पतये नम:” मंत्र का १०८ बार जाप करने से बुद्धि प्रखर होती है।
- तामसिक भोजन से दूरी: गुरुवार के दिन मांस-मदिरा या लहसुन-प्याज का त्याग करें। श्री बृहस्पति देव की आरती करने वाले जातक को इस दिन सात्विक रहना चाहिए।
- हल्दी का तिलक: प्रतिदिन स्नान के बाद केसर या हल्दी का तिलक मस्तक पर लगाएं। यह बृहस्पति की ऊर्जा को आपके आज्ञा चक्र में स्थिर करता है।
- स्वर्ण आभूषण: यदि संभव हो, तो गुरुवार को सोना धारण करें। सोना बृहस्पति की धातु है जो आपकी समृद्धि को आकर्षित करती है।
- पुस्तकों का दान: गुरु ज्ञान के देवता हैं। जरूरतमंद बच्चों को पुस्तकें या पेन दान करने से बृहस्पति देव की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
- मौन साधना: आरती के बाद कुछ मिनट मौन रहकर महादेव और गुरु का ध्यान करें।
बृहस्पति देव की आरती और ध्वनि चिकित्सा (Sound Healing Technique)
आधुनिक विज्ञान अब मंत्रों और आरतियों की शक्ति को ‘Vibrational Healing’ के रूप में स्वीकार कर रहा है। श्री बृहस्पति देव की आरती में प्रयुक्त शब्द एक विशेष फ्रीक्वेंसी (लगभग 528 Hz – Love Frequency) उत्पन्न करते हैं। जब हम समूह में या एकांत में लयबद्ध तरीके से श्री बृहस्पति देव की आरती गाते हैं, तो ये ध्वनियाँ हमारे शरीर की कोशिकाओं के ‘वाइब्रेशन’ को संतुलित करती हैं।
theshivling पर हम इस बात पर जोर देते हैं कि आरती करते समय ताली बजाना या शंख बजाना केवल परंपरा नहीं है। शंख की ध्वनि नकारात्मक ऊर्जा को नष्ट करती है और ताली बजाने से हमारे हाथों के ‘एक्यूप्रेशर पॉइंट्स’ दबते हैं, जिससे शरीर में ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है। श्री बृहस्पति देव की आरती के दौरान पीली मोमबत्ती या शुद्ध घी का दीपक जलाने से प्रकाश तरंगें गुरु ग्रह की किरणों के साथ तालमेल बिठाती हैं, जिससे घर के वातावरण में शांति और पवित्रता का संचार होता है।
विवाह और करियर में गुरु की महत्ता
आज के युवाओं के लिए श्री बृहस्पति देव की आरती एक वरदान है। बृहस्पति ग्रह को ‘भाग्य का विधाता’ माना गया है। यदि किसी की नौकरी नहीं लग रही या प्रमोशन रुका हुआ है, तो इसका सीधा अर्थ है कि उनका गुरु ग्रह पीड़ित है। गुरुवार को केले के जड़ की मिट्टी का तिलक लगाने और श्री बृहस्पति देव की आरती का श्रद्धापूर्वक पाठ करने से करियर की सभी बाधाएं दूर होने लगती हैं।
विवाह के मामले में, कन्या के लिए गुरु पति का कारक है और पुरुष के लिए गुरु संतान और धन का। इसलिए, एक सुखी वैवाहिक जीवन की नींव रखने के लिए श्री बृहस्पति देव की आरती का पाठ हर घर में होना चाहिए। यह न केवल आर्थिक समृद्धि लाता है, बल्कि परिवार के सदस्यों के बीच एक-दूसरे के प्रति सम्मान और प्रेम की भावना को भी पुष्ट करता है।
निष्कर्ष (Conclusion)
श्री बृहस्पति देव की आरती हमारे जीवन के अंधकार को मिटाकर ज्ञान का प्रकाश फैलाने वाली है। गुरु की कृपा के बिना ईश्वर तक पहुँचना संभव नहीं है। यदि आप भी अपने जीवन में सफलता, शांति और अखंड सौभाग्य चाहते हैं, तो प्रत्येक गुरुवार को पूरी श्रद्धा से यह आरती करें। theshivling.com पर हमारा निरंतर प्रयास है कि हम आपको देवों के देव महादेव और समस्त देवताओं की भक्ति से जोड़े रखें।
हर हर महादेव! जय बृहस्पति देव!

आरती संग्रह : देवी देवताओं की आरतियों के का अर्थ और महत्व
श्री हरी विष्णु भगवान जी की आरती
श्री सूर्य देव की आरती
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