क्या शाम को शिवलिंग पर जल चढ़ाना चाहिए या नहीं?, रात को शिवलिंग पर पानी चढ़ाने से क्या होता है?
औरतों को शिवलिंग छूना चाहिए या नहीं?, शिवलिंग पर पानी चढ़ाने का सही समय क्या है?
शिवलिंग से जुड़ेअक्सर बहुत से लोगों के मन में यह सवाल रहता है जो शायद आपके मन में भी हों।
आज हम इन्हीं सवालों के उत्तर स्पष्ट करने वाले हैं। विशेष रूप से आज हम आपको शाम को जल चढ़ाना चाहिए या नहीं – इस बात को स्पष्ट करना चाहते हैं। जल चढ़ाने का बहुत बड़ा महत्व है। इससे अनन्त कोटि पुण्यफल प्राप्त होता है व समस्त प्रकार के दुःख दूर होते हैं।
सवाल यह है कि शिवलिंग पर पानी चलाने का सही समय क्या है- आइये जानते हैं शिवलिंग से जुड़े रहस्य एवं शाम को शिवलिंग पर पानी चढ़ाना चाहिए या नहीं। शिवलिंग पर पानी चढ़ाने के विषय में आधिकारिक संस्थानों द्वारा निर्धारित नियमों का पालन करें।
शाम को शिवलिंग पर पानी चढ़ाने से श्रेष्ठ पुण्यफल प्राप्त होता है और दुःखों का निवारण होता है। स्त्रीयों को शिवलिंग छूने के साम्यों का पालन करें और सही समय में पानी चढ़ाएं। शिवलिंग से जुड़े रहस्य और इसके महत्व को समझें।
शाम को शिवलिंग पर जल या दूध चढ़ा सकते हैं या नहीं?
हिंदू धर्म में शिवलिंग और उस पर पानी चढ़ाने का विशेष महत्व होता है। सावन मास में भक्त शिव की कृपा प्राप्त करने के लिए जल चढ़ाते हैं। कई मंदिरों में शिवलिंग पर कलश लगा होता है, जिससे प्रतिदिन 24 घंटे पानी की बूंदें गिरती रहती हैं।
इसके पीछे एक कथा भी है। विषपान के दौरान जब हलाहल विष निकला था, भगवान शिव ने उसे अपने कंठ में समाहित कर इस सृष्टि की रक्षा की।
इसलिए पानी चढ़ाने से उनकी कृपा प्राप्त होती है और नकारात्मक ऊर्जा नष्ट होती है। हिंदू धर्म में यह मान्यता है कि भोलेनाथ स्वयं जल हैं और जल से ही उनका अभिषेक करने से उत्तम फल मिलता है। शिवलिंग पर लगे कलश और उससे लगातार गिरने वाली जल की बूंदें उस नकारात्मक प्रभाव को शांत करने के लिए होती हैं।
इसके अलावा शिवलिंग रेडिएशन की वजह से एक न्यूक्लिअर रिएक्टर की तरह होता है और इस प्रलयकारी ऊर्जा को शांत रखने के लिए जरुरी होता है।
ब्रह्ममुरारिसुरार्चितलिङ्गं निर्मलभासितशोभितलिङ्गम्। – जै शिव शंकर की, जय माँ गौरा की।
समाज में विभिन्न धार्मिक मतों और परंपराओं के अनुसार बातें फैलती हैं। कुछ लोगों का मानना है कि शाम को शिवलिंग पर पानी चढ़ाना नहीं चाहिए, लेकिन हम आपको यह बताना चाहते हैं कि भगवान शिव के इस पवित्र किसी भी समय जल चढ़ा सकते हैं। शिवरात्रि के दिन तो शुभहोते ही पूरी रात तक शिवलिंग पर अनवरत रूप से जल चढ़ाया जाता है।
आपने शायद भगवान शिव के कई मंदिरों में चौबीस घंटे शिवलिंग पर जल टपकते हुए भी देखा होगा। हाँ, बहुत से मंदिरों में शिवलिंग के ऊपर एक जल से भरा कलश रहता है, जिससे चौबीस घंटे शिवलिंग पर जल की धारा गिरती रहती है। इसका अर्थ होता है कि निरंतर शिवलिंग का अभिषेक होता रहता है।
ये सभी तथ्य आपको यह स्पष्ट करने के लिए बताए गए हैं कि शिवलिंग पर किसी भी समय पानी चढ़ाया जा सकता है।
शिवलिंग पर जल कौन से हाथ से चढ़ाना चाहिए?
शिव शंकर भोलेनाथ की शिवलिंग पर दाहिने हाथ से जल चढ़ाएं, भगवान शिव का अभिषेक जलधारा से करना चाहिए, जैसे जल की धारा एकदम पतली बह कर आती है ठीक वैसे ही एक धार में धीरे-धीरे भगवान शिव को जल चढ़ाने के समय शिव या ॐ का उच्चारण करते रहना चाहिए। नीलकंठेश्वर की हमेशा दाहिने हाथ से ही जल चढ़ाएं और बाएं हाथ से दाहिने हाथ की कोहिनी का स्पर्श करना चाहिए।
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